पाठक योजनाएँ – नवंबर 2022

चिन्‍ता मत करो − न अपने जीवन-निर्वाह की

चिन्‍ता मत करो − न अपने जीवन-निर्वाह की

25  
“मैं तुम लोगों से कहता हूँ, चिन्‍ता मत करो − न अपने जीवन-निर्वाह की, कि हम क्‍या खायें अथवा क्‍या पीयें और न अपने शरीर की, कि हम क्‍या पहनें। क्‍या जीवन भोजन से बढ़ कर नहीं? और क्‍या शरीर कपड़े से बढ़ कर नहीं?

26  
आकाश के पक्षियों को देखो। वह न तो बोते हैं, न लुनते हैं और न बखारों में जमा करते हैं। फिर भी तुम्‍हारा स्‍वर्गिक पिता तुम्‍हें खिलाता है। क्‍या तुम उनसे बढ़ कर नहीं हो?

27  
चिन्‍ता करने से तुम में से कौन अपनी आयु एक घड़ी भर भी बढ़ा सकता है?

28  
और कपड़ों की चिन्‍ता क्‍यों करते हो? खेत के फूलों से सीखो। वे कैसे बढ़ते हैं! वे न तो श्रम करते हैं और न कातते हैं।

29  
फिर भी मैं तुम से कहता हूँ कि राजा सुलेमान अपने समस्‍त वैभव में उन में से किसी एक के समान विभूषित नहीं था।

30  
ओ अल्‍पविश्‍वासियो! यदि परमेश्‍वर मैदान की घास को, जो आज भर है और कल आग में झोंक दी जाएगी, इस प्रकार पहनाता है, तो वह तुम्‍हें क्‍यों नहीं पहनाएगा?

31  
“इसलिए चिन्‍ता मत करो। यह मत कहो कि हम क्‍या खाएँगे, क्‍या पियेंगे, क्‍या पहनेंगे।

32  
इन सब वस्‍तुओं की खोज तो अन्‍यजातियाँ करती हैं। तुम्‍हारा स्‍वर्गिक पिता जानता है कि तुम्‍हें इन सभी वस्‍तुओं की जरूरत है।

33  
तुम सब से पहले परमेश्‍वर के राज्‍य और उसकी धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएँ भी तुम्‍हें मिल जाएँगी।

34  
अत: कल की चिन्‍ता मत करो। कल अपनी चिन्‍ता स्‍वयं कर लेगा। आज का दु:ख आज के लिए ही बहुत है।

Matthew 6 in Hindi

Matthew 6 in English

पाठक योजनाएँ – अक्तूबर 2022

पाठक योजनाएँ – अगस्त 2022

परमेश्‍वर के अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करें

इफिसियों 6:10-18

10  
अन्‍त में : आप-लोग प्रभु से और उनके अपार सामर्थ्य से बल ग्रहण करें।

11  
आप परमेश्‍वर के अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करें, जिससे आप शैतान की धूर्तता का सामना करने में समर्थ हों

12  
क्‍योंकि हमें निरे मनुष्‍यों से नहीं, बल्‍कि वर्तमान अन्‍धकार के अधिपतियों, अधिकारियों तथा महाशासकों से, स्‍वर्गिक क्षेत्र के दुष्‍ट आत्‍माओं से ही संघर्ष करना पड़ता है।

13  
इसलिए आप परमेश्‍वर के अस्‍त्र-शस्‍त्र से सुसज्‍जित हों, जिससे आप दुर्दिन में शत्रु का सामना करने में समर्थ हों और अन्‍त तक अपना कर्त्तव्‍य पूरा कर विजय प्राप्‍त करें।

14  
आप सत्‍य का कमरबन्‍द कस कर, धार्मिकता का कवच धारण करें

15  
और शान्‍ति का शुभ समाचार सुनाने के लिए उत्‍साह की चप्‍पल पहन कर खड़े हों।

16  
साथ ही विश्‍वास की ढाल धारण किये रहें। उस से आप दुष्‍ट के सब अग्‍निमय बाण बुझा सकेंगे।

17  
इसके अतिरिक्‍त मुक्‍ति का टोप पहन लें और आत्‍मा की तलवार-अर्थात् परमेश्‍वर का वचन-ग्रहण करें।

18  
आप लोग हर समय पवित्र आत्‍मा में सब प्रकार की प्रार्थना तथा निवेदन करते रहें। आप लोग जागते रहें और सब सन्‍तों के लिए लगन से निरन्‍तर प्रार्थना करते रहें।

Ephesians 6 in Hindi

Ephesians 6 in English